प्री बोर्ड परीक्षाओं (Pre-board Exam) से पहले ये चीजों से दूर रखें अपने बच्चों को

By Kavya |5 - 6 mins| February 08, 2021

बोर्ड एग्जाम से पहले स्कूल की तरफ बच्चों की परीक्षा की तैयारी का जायजा लेने के लिए 10वीं और 12वीं के छात्रों की प्री बोर्ड परीक्षाएं होती हैं, जिनके नाम से पहले ही बच्चे काफी डरे रहते हैं। ऐसे में बच्चों के परीक्षाओं के तनाव को कम करने की बजाए कुछ माता-पिता उन्हें और अधिक तनाव में डाल देते हैं। इसीलिए अपने बच्चे को आप जरूर इन चीजों से रखें दूर।

बोर्ड परीक्षाओं का नाम सुनते ही बच्चे क्या उनके माता-पिता को भी पसीने आने लगते हैं। बच्चे पहले ही अपनी परेशानियों से जूझ रहे होते हैं, ऐसे में माता-पिता का दबाव भी उन्हें ठीक और तनाव में डाल देता है। बच्चे के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि उसे ज्यादा से ज्यादा तनाव की स्थिति से दूर रखा जाए। इसके लिए माता-पिता बच्चे की काफी मदद कर सकते हैं। How to Deal with Pre-board Exam Stress?

अपने बच्चों को प्री-बोर्ड की तैयारी में कैसे रखें तनाव से दूर – Pre Board Exam Stress

1. बच्चे की तुलना किसी से न करें

कई स्कूल एक की जगह दो से तीन प्री-बोर्ड परीक्षाएं अपने स्कूल में आयोजित करते हैं। इसकी एक वजह यह है कि वे सभी बच्चों को पूरी तैयारी करवाना चाहते हैं ताकि बच्चे पूरे आत्म-विश्वास के साथ बोर्ड की परीक्षाओं में बैठ सकें। ऐसे में कई बार बच्चों का परीक्षओं में परिणाम ऊपर-नीचे हो सकता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि आप बच्चे की तुलना उसके किसी अन्य मित्र से करें।

अपने बच्चे के प्रदर्शन को बेहतर करने का यह सही तरीका नहीं है। दूसरों से तुलना करने की जगह आपको अपने बच्चे के ही पहले के प्रदर्शन की तुलना अब से करनी चाहिए। अगर बच्चे के प्रदर्शन में कोई कमी आई भी होगी तो बच्चा इसमें खुद को हीन भावना से नहीं देखेगा।

2. बच्चे को लगातार पढ़ने को न कहें

कई बार माता-पिता को लगता है कि मेरा बच्चा तो कुछ ही समय पढ़ता है ऐसे में उसके अंक सही नहीं आएंगे, इसीलिए वे दिनभर बच्चे को बार-बार पढ़ लेने को कहते रहते हैं। कुछ बच्चे पढ़ाई के लिए अलग-अलग रणनीति बनाते हैं और वे अपने हिसाब से पढ़ाई करना चाहते हैं। अगर आपको लगे कि आपका बच्चा सिर्फ टाइम पास कर रहा है तो आप जरूर उसे पढ़ने को कह सकते हैं, पर लगातार बोलने की वजह से कई बार बच्चे बिल्कुल ही पढ़ाई नहीं करते। इसीलिए आप बच्चे को कहने की जगह प्रोत्साहित करने की कोशिश करें।

3. बच्चे के मनोरंजन के माध्यमों को बंद न करें

यह एक पुराना तरीका है माता-पिता का बच्चों को पढ़ाई में लगाने का। लेकिन सच बताइए यह तरीका कितना कारगर है? शायद यह तरीका 10 प्रतिशत बच्चों पर भी काम नहीं करता। प्री-बोर्ड से पहले बच्चों से आप उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप या टेलीविजन का रिमोट नहीं छीन सकते। इसकी जगह आप उनके कमरे में पढ़ाई के दौरान इन चीजों का इस्तेमाल जरूर बंद कर सकते हैं।

4. बच्चों की आलोचना करने से बचें

माता-पिता कई बार बच्चे को सही राह पर लाने के लिए उनकी आलोचना का रास्ता भी अपनाते हैं। पर यह सही तरीका नहीं माना जा सकता। आजकल आलोचना से ज्यादा प्रोत्साहन को तव्वजो दी जाती है। अगर आपको अपने बच्चे को किसी काम को करने से मना करना है तो आप उसे किसी दूसरे काम को करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, ताकि बच्चे का ध्यान गलत चीज से हट कर सही दिशा में लग जाए।

आप इस बात को ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर आप बच्चे को उसके कम अंकों के लिए बुरा कहते ही रहेंगे तो शायद उसे लगे कि इतनी मेहनत का कोई फायदा नहीं और वह तैयारी करना ही बंद कर दे। वहीं अगर आप अपने बच्चे को कहेंगे कि अगर दिन में 3 से 4 घंटे पढ़ने के बाद वह 60 प्रतिशत अंक ला सकता है तो और ज्यादा तैयारी करने पर उसका परिणाम कितना बेहतर हो सकता है।

5. बच्चे की दोस्तों से बातचीत बंद न करें

परीक्षाओं के तनाव में बच्चे अपना सच्चा हमदर्द अपने दोस्तों को मानते हैं जो उनके साथ ही परीक्षाओं को लेकर तनाव और दबाव में होते हैं। ऐसे में आप दोस्तों को रोक कर बच्चों के डर, उनके तनाव और चिंता के बाहर निकलने के माध्यम को भी बंद कर देते हैं। बच्चों को पूरा दिन नहीं, पर कुछ वक्त अपने दोस्तों से बात करने की अनुमति जरूर मिलनी चाहिए। इसके साथ एक बात आप और अपने बच्चों के फायदे के लिए कर सकते हैं कि एक सेट परीक्षाओं का खत्म होने के बाद आप बच्चे को एक दिन दोस्तों के साथ आराम से बातचीत करने का मौका भी दे सकते हैं। इससे बच्चे खुद को और भी तरो-ताजा और ऊर्जावान महसूस करते हैं।

6. बच्चों के खान-पान और दिनचर्या का रखें ध्यान

परीक्षाओं के दौर में बच्चे अपने खाने-पीने और सोने-जागने की दिनचर्या को भी पूरी तरह से बदल देते हैं। पर इस बात का ख्याल आपको रखना है कि बच्चे के सामान्य कार्यों में ज्यादा बदलाव नहीं आना चाहिए और बच्चे को संतुलित भोजन के साथ-साथ पर्याप्त नींद भी जरूर मिलनी चाहिए।

7. बच्चे से बातचीत बनाए रखें

अक्सर परीक्षाओं के बीच बच्चे अपने कमरे का दरवाजा बंद रखते हैं। पर कई बार बंद दरवाजे के पीछे बच्चे अकेले तनाव और दबाव का सामाना कर रहे होते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्चे के साथ सेहतमंद बातचीत बनाए रखें ताकि आप उनके दिल की और वे आपके दिल की बात को समझ पाएं।

8. अपनी अपेक्षाओं में बच्चे को न दबाएं

निश्चित तौर पर प्री बोर्ड के अंक ही आपको बताएंगे कि बोर्ड परीक्षाओं के लिए बच्चे की तैयारी कैसी है। पर इस बात का भी आपको ध्यान रखना चाहिए कि परीक्षाओं का जरूरत से ज्यादा भी दबाव बच्चों पर न डाल दिया जाए। आप अपने बच्चे से उसकी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन की उम्मीद कर सकते हैं। आप अपने बच्चे को किसी भी अन्य व्यक्ति के मुकाबले काफी बेहतर जानते हैं। इसीलिए आप उससे ऐसी अपेक्षाएं बिल्कुल भी न लगाएं कि उसके लिए प्री-बोर्ड भी मुश्किल हो जाएं।

बच्चों के साथ बातचीत करना, उनके आस-पास के माहौल को हल्का बनाए रखना और उनसे जरूरत से ज्यादा उम्मीद न करना, शायद इन परीक्षाओं में उनकी सबसे बड़ी सहायता होगी, जिसकी उम्मीद बच्चे अपने माता-पिता से हमेशा करते हैं।


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Kavya

Last Updated: Mon Feb 08 2021

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