अच्छे माता-पिता बनने के लिए होनी चाहिए ये खूबियां- Top Parenting Skills to Develop to be a Good Parent

By Kavya |7 - 8 mins| July 14, 2020

क्या आप एक अच्छे अभिभावक बनना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चे में ढेर सारी खूबियां हों? अगर आपका जवाब हां है तो उसके लिए जरूरी है कि आपमें अच्छे माता-पिता बनने के लिए जरूरी ये कौशल होने चाहिए।

अच्छे माता-पिता बनने का कोई क्रेश कोर्स होता तो शायद दुनियाभर के माता-पिता अपने बच्चों को सबसे बेहतरीन परवरिश दे रहे होते। इसका मतलब यही है कि इसका कोई कोर्स नहीं है और न ही अच्छे माता-पिता बनना किसी को सिखाया जा सकता है। लेकिन हां, कुछ ऐसी बातें या ऐसे कौशल जरूर हैं, जिनकी सलाह सभी पेरेंटिंग विशेषज्ञ देते हैं। ये कौशल क्या हैं, आइए जानते हैं। Let us know about Top Parenting Skills to Develop to be a Good Parent

अच्छे माता-पिता बनने के लिए होनी चाहिए ये खूबियां

1. अपने बच्चे के सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान दें

विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को अपने बच्चे के अच्छे रवैये या उनके सकारात्मक व्यवहार पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, बजाए उनके बुरे या नकारात्मक व्यवहार पर। माता-पिता जितना अपने बच्चे को उसके बुरे व्यवहार के बारे में डांटेंगे, बच्चा उतना ही इसकी तरफ आकर्षित होगा। इसे पेरेंटिंग की भाषा में नकारात्मक रवैया या नेगेटिव अपरोच कहते हैं।

आमतौर पर जब माता-पिता बच्चों की बात पर कम ध्यान देते हैं तो बच्चे कुछ न कुछ गलत काम करके उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं और इसमें सफल भी होते हैं। उदाहरण के लिए बच्चा दिन भर अपने बर्तनों को टेबल से उठाकर रसोई में रखता है तो शायद माता-पिता का ध्यान नहीं जाता, लेकिन एक दिन जब वह बच्चा यह काम नहीं करता या फिर बर्तनों को पटकने लगता है तो माता-पिता तुरंत उसे डांटते हैं। विशेषज्ञ इसी व्यवहार से बचने को माता-पिता को कहते हैं। उनका कहना है कि आप अपने बच्चे के अच्छे कामों पर ज्यादा ध्यान दें।

2. अपने बच्चे को दूसरों की जरूरत पर ध्यान देना सिखाएं

बच्चों को बांटने में खुशी मिलती है। खासतौर पर यह खुशी और भी बढ़ जाती है जब वह चीज बच्चा अपने त्याग के बाद दे तो। ज्यादातर बच्चे अपने बारे में सोचते हैं, लेकिन अगर उन्हें देना या बांटना सही समय पर सिखाया जाए तो उन्हें अपनी चीजों को बांटने में भी खुशी मिलती है। बच्चों को सिखाने के लिए बेहतर है कि आप कोई भी काम उन्हें कर के दिखाएं जैसे कि आप बच्चों के सामने किसी जरूरतमंद को कोई सामान दें।

3. बच्चे पर न चिल्लाएं

मौजूद जीवनशैली में तनाव और दबाव के कारण माता-पिता ज्यादातर बच्चों पर चिल्लाते हैं। क्या आपके चिल्लाने से आपकी परेशानी दूर हो गई? नहीं न। बल्कि इससे परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि बच्चों पर चिल्लाने से आपके रिश्तों में दूरी आ जाती है। साथ ही बच्चों का व्यवहार भी काफी उत्तेजक हो जाता है। माना कि कभी-कभी बच्चे वाकई हद कर देते हैं, लेकिन वे बच्चे हैं। जब तक बात बच्चों की सुरक्षा की न हो आपको बच्चों पर चिल्लाना कतई नहीं चाहिए। अगर आप उन्हें अपनी कोई बात समझाना चाहते हैं तो उससे पहले आप बच्चे का नजरिया और उसके मनोभावों को समझें।

कैंसे करें अपने गुस्से पर काबू:

  • निर्णय करें कि आप बच्चे पर बिल्कुल भी नहीं चिल्लाएंगे।
  • गुस्सा आने पर आप क्या करेंगे, जब भी पहले ही सोच लें।
  • अगर जरूरी हो तो ऐसी परिस्थिति में आप कुछ समय के लिए बाहर चले जाएं।
  • 5 बार गहरी सांस लें।
  • बच्चे को धमकियां न दें।
  • आप सोचें कि इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए।
  • बच्चे से बात करें और उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें।

4. बच्चे को जिम्मेदारियां दें

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बड़ा होकर अपनी जिम्मेदारियां उठाए तो उसकी शुरुआत आपको अभी से करनी होगी। आप अपने बच्चे को घर के छोटे-छोटे कामों को करने को कहें। इसके साथ ही आप जब घर से जुड़े कुछ निर्णय ले रहे हों, तो उनकी राय भी जरूर लें। इससे बच्चों को पता चलेगा कि आप सभी के सुझावों को सुनते हैं और छोटे-छोटे काम करते रहने से वे आत्म-निर्भर और आत्म-विश्वासी भी बनेंगे।

5. अपने साथी के साथ अपना रिश्ता मधुर रखें

अच्छे माता-पिता होने के साथ आपका अच्छा साथी बनना भी बहुत जरूरी है। बच्चों की परवरिश किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है, इसीलिए जरूरी है कि आप दोनों के बीच अच्छा रिश्ता होना चाहिए। आप एक-दूसरे की परेशानी और जरूरत को भी अच्छे समझने का प्रयास करें।

  • इल्जाम लगाने की जगह समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने का प्रयास करें।
  • सही होने से ज्यादा जरूरी है आप दोनों के रिश्ते का मधुर होना।
  • एक-दूसरे से बातचीत जरूर करें।
  • अपनी जिम्मेदारियों पर बातचीत करें, न कि अधिकारों के बारे में।
  • दूसरे की गलतियों की अनदेखी करें।
  • अपनी शादीशुदा जिंदगी की तुलना दूसरों से न करें।
  • अपने साथी की इज्जत करें और उन्हें ध्यान से सुनें।

6. बच्चों को चुनौतियां लेना सिखाएं

बच्चे तो किसी भी नई चीज जो उन्हें मुश्किल दिखती हो, उसके लिए न ही कहेंगे। इसीलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे को चुनौतियों का सामना सकारात्मक तरीके से करना सिखाएं: विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग चुनौतियों को सकारात्मक तरीके से देखते हैं, उन्हें सफलता जरूर मिलती है। वहीं जो लोग चुनौतियों को नकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं, वे पहले ही इनसे हार मान लेते हैं और इन्हें स्वीकार ही नहीं करते। जो लड़ेगा ही नहीं, वो जीतेगा कैसे? हमें अपने रवैये को भी चुनौतियों के प्रति सकारात्मक बनाए रखना चाहिए और अपने बच्चों को बताना चाहिए कि कैसे आप किसी चुनौती का सामाना करते हैं।

7. जो काम बच्चे खुद कर सकते हैं, उन्हें आप न करें

मेरा बच्चा है, उसे काम करने की क्या जरूरत है या मेरा बच्चा अभी इस चीज के लिए बहुत छोटा है, वह कैसे करेगा? ऐसी बातों के साथ ही हम अपने बच्चों के लिए वे काम भी कर लेते हैं, जिन्हें उनकी उम्र का कोई भी दूसरा बच्चा बेहद आसानी से कर सकता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा कुछ सीखे तो उसे उसके काम खुद करने दें। हो सकता है कि शुरू में वह चीजों को गलत या सही तरीके से न कर पाए। लेकिन उसे खुद से सीखने दें।

8. बच्चों पर नियंत्रण न बनाए रखें

माता-पिता अक्सर चाहते हैं कि उनका बच्चा उनके नियंत्रण में रहे। लेकिन आपका नियंत्रण बच्चे के लिए बाधा भी बन सकता है। बच्चे के हर चीज, हर बात में आपको अपनी राय देने की जरूरत नहीं है, खासकर तब जब आपके बच्चे टीनएज या उससे अधिक उम्र के हों तो। बच्चों पर नियंत्रण बनाए रखने से ज्यादा जरूरी है, उन्हें दोस्त या मार्गदर्शक बन कर चीजों को सीखाना। बच्चे से प्यार करने का मतलब उसे अपने जैसा बनाना नहीं है, बल्कि आप उसे उसके जैसा बनने दें।

9. बच्चों को परिस्थितियों से लड़ना और आगे बढ़ना सीखाएं

परिस्थितियों से कैसे पार पाया जाए, जिसने इस कला को सीख लिया वह भवियय में भी कभी नहीं हारता। ऐसा ही हमें अपने बच्चों को सिखाना है कि कैसे वे परिस्थितियों से डरें नहीं, बल्कि उनसे लड़ें और आगे बढ़ें। इसके लिए आप को चाहिए कि:

  • आप बच्चे को पहली बार में ही बिल्कुल सही करने की जगह उन्हें उनके काम में सुधार लाने के बारे में प्रोत्साहित करें।
  • बच्चे को ऐसी चुनौतियां लेने को कहें, जो उनकी उम्र के अनुकूल हों।
  • परिणाम से ज्यादा प्रयास को प्राथमिकता दें।
  • बच्चों को अपने उदाहरण से सिखाएं कि कैसे बार-बार प्रयास करने से सफलता मिल ही जाती है।
  • बच्चों को अपनी परिस्थितियों और चुनौतियों के बारे में भी बताएं, जिनका आपने उस आयु में सामना किया हो।
  • उन्हें गलतियां करने दें।

10. बच्चे को दें सुरक्षा की भावना

माता-पिता अपने बच्चों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, लेकिन आपकी यह चिंता हो सकता है कि आपके बच्चे के दिमाग पर गहरा असर डाले। इसीलिए आपको अपने बच्चे को हमें सुरक्षा की भावना देनी चाहिए। इसके लिए आप अपने बच्चे को अपना प्यार जताएं, लेकिन उसे प्यार में बांधें नहीं, उनकी सही कामों और प्रयासों पर तारीफ करें, उन्हें सम्मान दें, उनकी भावनाओं को समझें, जब आप बच्चे के साथ हों तो उन पर पूरा ध्यान दें।


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Kavya

Last Updated: Tue Jul 14 2020

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