छोटे बच्चों में दस्त: कारण, लक्षण और घरेलू नुस्खे, उपाय – Home Remedies for Diarrhea in Toddlers in Hindi

By Editorial Team|5 - 6 mins| July 28, 2020

छोटे बच्चे को लेकर आमतौर पर माता-पिता पहले ही काफी चिंतित रहते हैं। ऐसे में दस्त (डायरिया) जैसी बीमारी न सिर्फ बच्चे को शारीरिक तौर पर कमजोर बना सकती है, बल्कि माता-पिता के लिए भी परेशानी का सबब बन सकती है। आइए जानते हैं छोटे बच्चों में दस्त के कारण, उसके लक्षण और घरेलू नुस्खे, उपाय के बारे में (Diarrhea in Toddlers – Reasons, Symptoms and Home Remedies in Hindi)

दस्त वैसे तो पेट में गड़बड़ी की निशानी है, लेकिन इसकी अनदेखी कभी-कभी छोटे बच्चों के लिए जानलेवा भी बन जाती है। डॉक्टर्स की मानें तो एक दिन में अगर छोटे तीन बार से अधिक मल त्यागते हैं और उनका मल जरूरत से अधिक पतला हो तो उसे दस्त की श्रेणी में रखा जाता है।

छोटे बच्चों को दस्त होने के कारण – बच्चों में डायरिया के 7 प्रमुख कारण

बच्चों को दस्त होने के कई विभिन्न कारण हो सकते हैं, क्योंकि इस समय तक वे ठोस भोजन के अलावा खुद से भी काफी चीजों को मुंह में डालते हैं। जिसकी वजह से गंदगी के साथ-साथ बच्चों को बीमार करने वाले किटाणु भी साथ में उनके मुंह से होते हुए उनके पेट में पहुंचते हैं। आइए जानते हैं, इसके मुख्य कारणों के बारे में।

1. रोटावायरस

यह एक ऐसा विषाणु होता है जो बच्चों को गेस्टोएंटराइटिस संक्रमण से प्रभावित कर सकता है। जिसमें बच्चे को कफ, बुखार के साथ-साथ गंभीर रूप से दस्त की शिकायत हो सकती है। इस वायरस पर काबू न किया जाए तो वह गंभीर रूप ले सकता है, पर इसे काबू करने के लिए वैक्सीन मौजूद है। यहां तक कि बच्चों को सही समय पर इसकी वैक्सीन वैसे भी दिलवा देनी चाहिए। बच्चे के बीमार होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

2. ई. कॉली

यह एक बैक्टीरिया है जो कच्चे या कम पक्के हुए भोजन के सेवन से हमारे शरीर में प्रवेश करता है। इसके अलावा टॉयलेट के प्रयोग के बाद में अगर हाथों को अच्छे से न धोया जाए तब भी ई कॉली नामक बैक्टीरिया से प्रभावित होने का खतरा रहता है। इस प्रकार के दस्त में बच्चे को रेशे और खून वाला मल होता है।

3. दूध के कारण दस्त

जी बिल्कुल, छोटे बच्चे जो ज्यादातर दूध पर निर्भर रहते हैं, उन्हें दूध को ठीक से न उबालने की वजह से भी दस्त की समस्या होती है। इसकी वजह है कैम्पीलोबैक्टर बैक्टीरिया। यह बैक्टीरिया पालतू जानवरों के मल के संपर्क में आने से भी बच्चों को अपनी गिरफ्त में ले सकता है।

4. सालमोनेला

यह बैक्टीरिया बच्चों के शरीर में दूषित भोजन या अस्वच्छ जगह को छूने से प्रवेश करता है। इसकी वजह से बच्चे को तेज बुखार, पेट में मरोड़ और दस्त की समस्या हो जाती है।

5. विषाक्त भोजन

जब बच्चा बासी भोजन करता है, जिसमें कई प्रकार के बैक्टीरिया, फंगस आदि अपना घर बना लेते हैं तो बच्चों को फूड पोइजनिंग या भोजन की विषाक्तता की समस्या से जूझना पड़ता है। जिसमें से आम बात है दस्त या उल्टी का लगना और बुखार का होना है।

6. दांत निकलना

छोटे बच्चों के जब दांत निकलने का समय होता है तब भी बच्चों को दस्त की समस्या होने लगती है। इसका दस्त का दांत निकलने से वैसे तो सीधा कोई संबंध नहीं है, लेकिन देखा गया है कि दांत निकलने के समय मसूड़ों में दर्द और खुजली की वजह से बच्चा हर चीज को मुंह में डालना चाहता है। ऐसे में कई बार किसी गंदी चीज को मुंह में डालने की वजह से भी उन्हें दस्त की समस्या होती है।

7. दवाइयों के कुप्रभाव

आमतौर पर जो बच्चे लंबे समय से एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन कर रहे होते हैं, वे भी दस्त की समस्या के शिकार हो जाते हैं।

दस्त के लक्षण – डायरिया के लक्षण

दस्त के शुरुआती लक्षणों में बेहद पतला मल होना। एक दिन में 3 से लेकर 10 बार तक पतले मल का होना शामिल है। इसके अलावा भी कई ऐसे लक्षण हैं, जो बच्चे के दस्त से प्रभावित होने की ओर इशारा करते हैं।

  • डायपर बदलने के समय में आप देखेंगे कि बच्चे को कम मात्रा में ठोस मल के साथ-साथ काफी पतला मल अधिक हो रहा है और उसकी निरंतरता भी बढ़ रही है।
  • लूज मोशन या पतले दस्त होने के साथ बच्चे को पेट में दर्द हो रहा है और मरोड़ भी उठ रहे हैं।
  • दस्त की वजह से बच्चा बहुत ही कम मात्रा में पेशाब करता है।
  • बच्चा दस्त की वजह से काफी शिथिल दिखा दे रहा है।

दस्त डायरिया के घरेलू नुस्खे उपचार

दस्त का उपचार आप घर से ही शुरू कर सकते हैं। (Home Remedies for Loose Motion (Diarrhea) in hindi)

  1. बच्चे को एक गिलास पानी में दो चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक मिलाकर उसे थोड़ी-थोड़ी देर में पीने को दें।
  2. नारियल पानी भी बच्चे के लिए फायदेमंद है, इससे दस्त की वजह से बच्चे के शरीर में हुई पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा किया जा सकता है।
  3. किसी भी कैमिस्ट से मिलने वाले ओआरएस यानी ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन लें और पानी में घोल कर बच्चे को पिलाएं।
  4. बच्चे की स्थिति गंभीर होती दिखे तो आप बच्चे के डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
  5. बेहद गंभीर स्थिति में डॉक्टर बच्चे को स्लाइन के माध्यम से भी उसके शरीर में पानी की कम होती मात्रा को बढ़ाने की सलाह देते हैं।
  6. दस्त होने पर डॉक्टर की ओर से बताया गया पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी होता है, ताकि बैक्टीरिया या वायरस को पूरी तरह से शरीर से बाहर निकाला जा सके।

वैसे तो बच्चों को दस्त होना कोई चिंता की बात नहीं है, लेकिन इसकी वजह से बच्चे के शरीर में पानी की कमी की वजह से कई बार यह समस्या काफी गंभीर रूप ले लेती है। इसीलिए आप बच्चे के सुखते मुंह, रोने पर आंसू न होना या उसके तेजी से घटते वनज पर अपनी नजर जरूर बनाए रखें। साथ में इस समस्या के बड़े होने से पहले ही उसे डॉक्टर के पास ले जाएं और उसका इलाज शुरू करवाएं।    


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Last Updated: Tue Jul 28 2020

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