बच्चे को सिखाएं स्कूल में अपनी सुरक्षा खुद करना – Safety at School for Kids in Hindi

By Kusum Lata|8 - 9 mins| June 21, 2020

अरुणिमा के दो बच्चे हैं। एक बेटा 12 साल का जो सातवीं क्लास में पढ़ता है और दूसरी बेटी 7 साल की जो दूसरी क्लास में है। दोनों बच्चे अभी नादान और मासूम हैं। अरुणिमा और उसके पति विमल बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं। लेकिन कई बार उनकी सुरक्षा को लेकर वे परेशान हो उठते हैं। इसकी वजह यह है कि जब बच्चे स्कूल में उनकी आँखों से दूर, घर से बाहर होते हैं तो उनका ध्यान कौन रखेगा। अभी पिछले कुछ समय में स्कूल में बच्चों के साथ हुई दुर्घटनाओं से ये काफ़ी भयभीत हैं।  वैसे भी इस उम्र के बच्चे इतने समझदार नहीं होते कि वे अपना भला – बुरा समझ सकें। इसके लिए बेहतर उपाय यही है कि माँ -बाप यह  जिम्मेदारी निभाएं और अपने बच्चे को उसके सुरक्षा के  लिए ज़रूरी बातें उसे अच्छी तरह से समझा दें। आजकल किसी पर आँखें मूँदकर भरोसा नहीं किया जा सकता इसलिए बच्चों को स्कूल जाते वक़्त इन बातों से ज़रूर परिचित कराएं।

बच्चे को सिखाएं ये 18 बातें स्कूली सुरक्षा के बारे में

1. सबसे पहले आप बच्चे के दोस्त बनें

एक बच्चे के माता – पिता होने के साथ ही उनका दोस्त भी बनें। उनसे घुलमिलकर रहें। उनके साथ खूब खेलें, हंसी – मजाक करें। इससे बच्चा आपसे डरेगा नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह अपने मन की बात बता पाएगा। आपका फर्ज़ बनता है कि उसके स्कूल से और उससे जुड़ी हर जानकारी आप रखें। ऐसा करके बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी आप बखूबी निभा पाएंगे।

2. बच्चा बहुत जल्दी स्कूल न जाए

आमतौर पर स्कूल पहुँचने का समय आठ बजे होता है। बच्चा स्कूल के समय से बहुत पहले क्लास में जाकर न बैठे। ज्यादा देर तक रोजाना क्लास में अकेले बैठना किसी दुर्घटना को न्यौता देना हो सकता है। समय से पाँच – दस मिनट पहले बच्चे को स्कूल भेजें। अगर बच्चा जल्दी स्कूल जाता है तो कुछ बच्चों या टीचर के आ जाने तक उसे स्कूल के रिसेप्शन या किसी ऐसी जगह बैठने को कहें जहाँ दो – चार लोग और मौजूद हों जैसे मेनगेट के पास।

3. सुनसान वाॅशरूम में न जाए

बच्चे को समझाएं कि वह ऐसे समय वॉशरूम जाए जब वहां सुनसान न हो, अन्य बच्चे भी हों या उस वॉशरूम में जाए जिसमें अटेंडेंट या आया रहती हो। क्लास के बीच में वॉशरूम जाना भी है तो कोशिश करे कि किसी क्लासमेट के साथ जाए।

4. स्कूल के किसी स्टाफ के कहने पर कहीं न जाए

स्कूल में बहुत स्टाफ होता है जैसे माली, ड्राइवर, गेट कीपर, स्वीपर, कैंटीन बॉय आदि। बच्चे को सख्त हिदायत दें कि वह किसी के कहने पर इधर – उधर न जाए। अगर उससे कोई कुछ कहता है तो वह उसी समय अपनी टीचर को बताए।

5. स्कूल में इधर – उधर न घूमे

माता -पिता बच्चे को स्कूल में बिना किसी काम के इधर उधर न घूमने की बात कहें। स्कूल में बहुत से कमरे ऐसे होते हैं जिनमें बच्चे समय के अनुसार जाते हैं, हर समय बैठे नहीं रहते। ऐसे कमरे हैं साइंस लैब, आर्टरूम, किसी खास खेल का हॉल आदि। बच्चे को कहें कि जब पूरी क्लास को वहां जाना हो, तभी वह भी जाए। अगर किसी टीचर के कहने पर क्लास कहीं बच्चा कहीं जाता है तो उसके पास परमिशन कार्ड ज़रूर होना चाहिए।

6. किसी सीनियर बच्चे की हर बात न माने

अपने बच्चे को यह बात समझाएं की हर वक्त, हर किसी की, हर तरह की बात मानना ज़रूरी नहीं है। हाँ बात अगर पढ़ाई लिखाई से जुड़ी है तो ठीक है वरना कोई स्कूल में यहां – वहां भेज रहा है तो यह गलत है।

7. घर जाकर मम्मी – पापा को सारी बातें बताए

अपने बच्चे को समझाएं कि वह घर आकर उन्हें स्कूल की हर अच्छी – बुरी बात बताए। कई बार होता है कि बच्चा सही – गलत नहीं समझ पाता लेकिन माँ – बाप उस बात का आशय समझ जाते हैं।

8. स्कूल में कुछ भी अजीब लगे तो टीचर और मम्मी – पापा को बताए

स्कूल में बच्चे को कुछ भी ऐसा दिखे जो नहीं होना चाहिए तो उसी समय अपनी टीचर को और घर में मम्मी -पापा को बताए। वह घटना जो अजीब हो और बच्चे को बुरी लगे उसे बच्चा घर में ज़रूर बताए। यह बात चाहे आपके बच्चे से जुड़ी हो या उसके स्कूल के किसी और छात्र से, अपने बच्चे को समझाएं कि घर में बताना ज़रूरी है।

9. स्कूल में किसी से गलत व्यवहार न करे

अपने लाडले को स्कूल में कदम रखते वक़्त समझाएं कि वह किसी से गलत व्यवहार न करे। किसी क्लासमेट, सीनियर, जूनियर या फिर टीचर या स्कूल के किसी भी स्टाफ के आदमी से बुरा व्यवहार न करे। किसी भी बच्चे के साथ मारपीट आदि न करे। कोई स्कूल में परेशान कर रहा है तो अपनी टीचर से जाकर कहे। इसका कारण यह है कि आजकल बड़े हों या बच्चे सबके मन में बदले की भावना बहुत जल्दी घर कर जाती है।

10. स्कूल में देर तक रुकने पर मेनगेट के करीब बैठे

बच्चा अगर रोजाना या कभी कभार स्कूल खत्म हो जाने पर मजबूरन रुकता है तो ऐसे में उससे मेन गेट के क़रीब ही रुकने को कहें। जब स्कूल खाली हो तो वह क्लास में या किसी और सुनसान जगह जाकर न बैठे।

11. किसी से अपने घर की बातें न बताए

बड़े होते बच्चे को अच्छी तरह से समझाएं कि वह अपने घर की बातें स्कूल में किसी से शेयर न करे। हो सकता है बच्चा रुपए – पैसे से जुड़ी कोई बात स्कूल में बता दे और पैसों के लालच में कोई बच्चे को नुकसान पहुंचा दे।

12. किसी मुश्किल में फँसने पर समझदारी से काम ले

अगर बच्चा स्कूल में किसी मुसीबत फँस जाता है तो उसे समझदारी से काम लेना सिखाएं। बच्चे को निडर रहने की सीख दें। उसे हिम्मत से काम लेना सिखाएं। इसके लिए उसे समस्या का उदाहरण देकर उससे छुटकारा पाने का तरीका सिखाएं।

13. स्कूल के बारे में पूरी जानकारी रखे

बच्चा जैसे ही बच्चा दूसरी -तीसरी क्लास में आता है, वह काफी हद तक समझदार हो जाता है। इस समय उससे कहें कि वह स्कूल के हर भाग, लैब, लाइब्रेरी, स्टाफरूम, म्यूजिक रूम, आर्ट रूम, प्रिंसीपल रूम, सीसीटीवी कैमरे की लोकेशन आदि की जानकारी रखे। जिससे ज़रूरत पड़ने पर वह मदद ले सके साथ ही कोई उसे बहका न सके। इमरजेंसी नंबर बच्चे को याद होने चाहिए।

14. अच्छे बच्चों से हो दोस्ती

बच्चे से अच्छी संगति में रहने को कहें। आप खुद भी उसके दोस्तों से मिलें, उनके बारे में जानें।

15. बच्चे को निडर और मज़बूत बनाएं

अपने आंखों के तारे को शुरू से ही निडर और मज़बूत बनाएं। उसे समझाएं कि किसी से डरने की जरूरत नहीं है। शारीरिक तौर पर भी बच्चे की खूब मज़बूत बनाएं। उसे सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाएं। तन और मन दोनों मायनों में बच्चे को सबल बनाएं।

16. ना कहना सिखाएं

कई बार बच्चे स्कूल में किसी के कुछ काम बताने पर मना नहीं कर पाते। वे ना कहने में हिचकते हैं। ऐसे में बच्चे को स्पष्ट ना कहने का अभ्यास कराएं। स्कूल में कोई कुछ लाने या भेजने जैसे व्यर्थ के काम कराता है तो यह गलत है। बच्चे को विनम्रता से ना कहने को कहें।

17. ज़रूरत पड़ने पर चिल्लाने को कहें

कभी किसी मुश्किल में पड़ने पर बच्चे को जोर से चिल्लाने की सीख दें। जैसे ही बच्चे को कोई खतरा लगे तो जितनी तेजी से वह चिल्ला से सकता है, उतना तेज चिल्लाने को कहें। इससे परेशान करने वाला खुद ही डरकर भाग जाएगा।

18. कोई कुछ बताने को मना करता है तो वह बात मम्मी – पापा को ज़रूर बताए

अगर कोई अजनबी या फिर जान – पहचान का व्यक्ति बच्चे से कोई बात कह रहा है और घर में मम्मी – पापा से बताने को बिल्कुल मना कर रहा तो बच्चे को खूब प्यार से समझाएं कि वह उनको जरूर बताए। इससे भावी खतरे से बचाव हो सकता है।

तो इन उपायों पर अमल करें और अपने बच्चे को सुरक्षित रखें। उनके भविष्य में आगे बढ़ने की सही दिशा आपको ही दिखानी है। इसलिए आप भी सतर्क रहें और बच्चे को भी सावधान रहने को कहें। अभी से बच्चा खुद समझदार बनेगा, तभी जीवन में आने वाले संकटों का सामना करने में सक्षम होगा।

मर्लिन सीजे, प्रधानाचार्या, सेंट मैरी स्कूल तथा नीरज कुमारी – प्रधानाचार्या, जीजीएस एसएस, से बातचीत पर आधारित


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Kusum Lata

Last Updated: Sun Jun 21 2020

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