5 भ्रम और उनके सच बच्चों के हेल्दी खान-पान के बारे में

By Dr. Krystel Quadros|3 - 4 mins| April 28, 2020|Read in English

बच्चे के लिए क्या खाना सही है और क्या नहीं, इसे लेकर आप अक्सर पशोपेश में रहते हैं। इसकी एक अहम वजह है आजकल के भ्रामक विज्ञापन। यहां तक कि कई समाचार पत्र-पत्रिकाएं भी बच्चों के खाने की वस्तुओं को लेकर दावा करते हैं कि वे ज्यादा हेल्दी या स्वास्थ्यवर्धक हैं, लेकिन कई बार ये भी सिर्फ खोखले दावे ही साबित होते हैं।

बच्चों के हेल्दी खाने के 5 भ्रम और उनके सच

यहां हम आपको बच्चों की हेल्दी खाने को लेकर ऐसे ही भ्रम और उनके सच बता रहे हैंः

भ्रम 1 कम वसायुक्त भोजन मतलब बच्चों के लिए कम कैलोरीज

हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि कम वसायुक्त भोजन का मतलब यह नहीं है कि उसमें कैलोरीज भी कम होंगी। कई बार पाया गया है कि कुछ कम वसायुक्त भोजनों में अक्सर शुगर, सोडियम या अन्य पदार्थों के चलते कैलोरीज की मात्रा बढ़ जाती है। अपने बच्चों के लिए कम वसायुक्त भोजन खरीदने से पहले सामान पर लगे लेबल को सावधानीपूर्वक जांच लें।

भ्रम 2 ऑर्गेनिक भोजन नॉन-ऑर्गेनिक भोजन से हेल्दी होता है।

हम आसानी से इस बात को मान लेते हैं कि हमारे बच्चों के लिए नॉन-ऑर्गेनिक भोजन की तुलना में ऑर्गेनिक भोजन सही और हेल्दी होता है, मगर यह हर बार सही हो ऐसा भी जरूरी नहीं है। ऑर्गेनिक का मतलब कच्ची सब्जियों, फलों को कैसे उगाया गया है, इससे है। जिन सब्जियों-फलों को बिना किसी कृत्रिम कीटनाश्कों और रसायनों की सहायता से उगाया जाता है, उसे ऑर्गेनिक कहा जाता है। लेकिन ऑर्गेनिक का मतलब कभी भी उस फल या सब्जी से मिलने वाले के पोषक तत्वों से नहीं लिया जा सकता। जहां एक तरफ ऑर्गेनिक भोजन या पदार्थ हमारे पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, वहीं यह जरूरी नहीं कि उनके उपभोग से कम कैलोरीज मिलती हैं। 

भ्रम 3 आपके बच्चे के लिए ब्राउन ब्रेड बेहतर है

फूड उद्योग अपने सामान को बेहतर दिखाने के लिए काफी तिकड़मबाजी करता है और यह उसमें से ही एक है। ब्राउन का यहां मतलब कतई नहीं है कि वह सिर्फ गेहूं से बना है। अपने बच्चों के लिए सही भोजन खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उस पर ‘होल ग्रेन या होल‘ लिखा हो।

भ्रम 4 बच्चे का वजन कम करने के लिए आपको उसकी कैलोरीज में कमी करनी चाहिए।

अगर आपके बच्चे के भोजन में पहले ही कैलोरीज की मात्रा कम है या कहें कि वह एक दिन में सिर्फ 700 कैलोरीज ही लेता है तो इससे उसके वजन में कमी आ जाएगी। लेकिन यह कमी कुछ ही समय के लिए रहेगी। अगर इसे मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो लंबे समय के लिए एक कठिन डायट पर रहना बहुत मुश्किल है, क्योंकि कुछ समय बाद ही भूख लगने लगती है। इसीलिए अपने बच्चों को सही और संतुलित डायट लेने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि उन्हें थकान या भूख का अनुभव न हो और सही पोषक तत्व भी मिलें जो उनके विकास के लिए जरूरी हैं। साथ ही वे कुपोषण का शिकार भी न बनें।

भ्रम 5 कम कैलोरीज के लिए मक्खन की बजाए मार्जरीन का इस्तेमाल

मक्खन और मार्जरीन में लगभग एक समान कैलोरीज होती हैं। जबकि मार्जरीन में ट्रांस फैट होता हैं जो कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इस वजह से बच्चों में ह्रदय संबंधित समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं। उम्मीद करते हैं बच्चों की सही खान-पान को लेकर प्रचलित विभिन्न भ्रमों और उनके सच को लेकर आपको यहां मिली जानकारी पसंद आई होगी।


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About The Author:

Dr. Krystel Quadros

Dr. Krystel Quadros is a Dietician. She has Masters degree in Clinical Nutrition and Dietetics.

Last Updated: Tue Apr 28 2020

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