कैसे दें अपने बच्चों को वित्तीय शिक्षा – How To Teach Your Kids Financial Literacy in Hindi

By Ruchi Gupta|6 - 7 mins| July 10, 2020

अक्सर हम सभी अपने बच्चे के जन्म के साथ ही उसके लिए कई सपने बुनते हैं। उनकी शिक्षा-दिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए गुल्लक में की जाने वाली छोटी-छोटी बचत से लेकर बैंकों में सावधि जमा खता या फिक्स्ड डिपोजिट (F.D.) तक के बारे में भी सोचते हैं। लेकिन कभी आपने सोचा है अपने बच्चों को वित्तीय शिक्षा देने के बारे में? शायद नहीं, क्योंकि हम मान लेते हैं कि बच्चे खुद बड़े हो कर यह सब सीख लेंगे।

जैसे समय से पहले ही हम अपने बच्चों की स्कूली शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई के बारे में सोचते हैं, ठीक वैसे ही हमें बच्चों को सही समय पर वित्तीय शिक्षा भी देनी चाहिए। आखिर क्यों जरूर है, आपके बच्चे के लिए वित्तीय शिक्षा? तो इसका एक ही जवाब है कि इससे जब वे खुद बाजार या किसी और चीज में अपने लिए मौकों की तलाश में निकलेंगे तो कम से कम आप उनकी वित्तीय सुरक्षा और सही हालात दोनों को सुनिश्चित कर सकें।

आप यह जानकर काफी हैरान होंगे कि ज्यादातर मामलों में बच्चों को वित्तीय शिक्षा के नाम पर कॉलेज तक 15-16 साल की पढ़ाई में बेंकिंग के बेसिक के अलावा और कुछ भी नहीं पढ़ाया जाता। पैसों को कहां-कहां निवेश किया जा सकता है या उनकी बचत की जा सकती है, इसके सभी विकल्पों के बारे में भी उन्हें जानकारी नहीं होती। जरूरी है कि कम आयु के साथ ही अपने बच्चों को वित्तीय शब्दावली और निवेश और बचत की अवधारणा से रू-ब-रू कराएं। How To Teach Your Kids Financial Literacy in Hindi

5 टिप्स जिनकी मदद से शुरू होगी बच्चों की घर पर वित्तीय शिक्षा – Financial Literacy for Kids

1. जरूरत और इच्छा में सीखाएं फर्क

जब भी हम यह समझ जाएंगे कि हमें किस चीज की जरूर है और क्या चाहते हैं तब हम बेहद आसानी से और सही वित्तीय निर्णय ले पांएगे। एक परिवार में होने के नाते आप अपने कुछ पैसे जरूरतों जैसे कि भोजन, मकान या दुकान के किराये और दवाइयों पर खर्च करेंते हैं, जबकि कुछ खर्च हम अपनी पसंद या इच्छा जैसे कि खिलौनों, सुंदर कपड़ों-गहनों और घूमने-फिरने पर भी करते हैं, जो हमेशा ही हमारी जरूरत के बाद ही आएंगे।

आप अपने बच्चों को इन छोटी-छोटी चीजों के बारे में भी जरूर बताएं, खासकर तब जब आप अपने मासिक व्यय की सूची बना रहे हों। यहां से वे अकाउंट्स का बेसिक सीख सकते हैं, यानी कि कितने पैसे आए और कितने खर्च हुए। इसके बाद अगर कुछ बचता है तो उसे बचत में डाला जाता है। इससे बच्चों को भविष्य में सही निर्णय लेने में भी मदद मिलती है।

2. पैसों का उचित व्यय सीखाएं

आमतौर पर बच्चों को यह नहीं मालूम होता कि माता-पिता के पास कितने पैसे हैं, जिसकी वजह से वे अनावश्यक चीजों की मांग भी करते हैं। आप उन्हें बताएं कि आप एक समय में एक ही चीज को खरीद सकते हैं। जैसे कि अगर आप कभी राशन का सामान लेने जाएं तब वहां पर बच्चों को उनकी पसंद की दो विभिन्न चीजों में से कोई एक ही खरीदने की अपनी योग्यता के बारे में बताएं। आप उन्हें अपने कुल खर्च के बारे में बता सकते हैं कि फिलहाल आप कोई एक ही चीज ले पाएंगे। हमारी इस गतिविधि से बच्चों में प्राथमिकता तय करने का कौशल भी बढ़ता है, जो आगे चलकर सिर्फ आम जीवन में ही नहीं, बल्कि वित्तीय मामलों में निर्णय लेने में भी बच्चे के लिए मददगार साबित होगा।

3. कैसे बढ़ते हैं पैसे, बच्चे को सीखाएं

आमतौर पर हम बच्चों को घर में पैसों को बचाना तो सीखा पाते हैं, लेकिन कैसे उनमें वृद्धि होती है, यह हम बच्चों को करके नहीं दिखाते। इसके लिए आप कम उम्र में ही बच्चों का बैंक में एक जमा खाता खुलवाएं। इसमें आप बच्चे को हर महीने अपनी बचत को डालने को कहें। साथ ही उसे बताएं कि कैसे बैंक इस पैसे पर उसे ब्याज देगा और कैसे उसके पैसे बैंक खाते में खुद-ब-खुद बढ़ जाएंगे।

इसके अलावा आप टीनएज या किशोरावस्था के बच्चों को सावधि जमा खाता या एफडी के बारे में भी बता सकते हैं और उससे कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों को शेयर बाजार, म्युचुअल फंड आदि से भी रू-ब-रू करा सकते हैं। दरअसल यह सब बच्चे की सीखने की क्षमता और उसकी दिलचस्पी पर भी निर्भर करता है। ऐसे में कई बच्चे जो वित्त के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें इस विषय से संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश भी दिलाया जा सकता है।

4. बच्चों को व्यवहारिक तौर पर सीखाएं

बच्चों को भी सीखने में तभी मजा आता है, जब उन्हें वैसे करके देखने को मिलता है। यानी वे हर चीज को खुद से करके उसे सीखना चाहते हैं। ऐसे में आप अपने छोटे बच्चों को बचत करने के लिए एक नहीं, बल्कि दो गुल्लक लगा कर दें। एक जिसके बाहर लिखें खर्च के लिए और दूसरा जिस पर लिखा हो बांटने के लिए।

आपके बच्चे को कहीं से भी पैसे मिले हों, आप उसे कहें कि वे इन पैसों को दोनों गुल्लकों में बराबर डाले। जब भी बच्चा अपनी पसंद से कोई चीज चाहे वो कोई खिलौना हो या कोई अन्य सामान उसके लिए वह खर्च के लिए वाली गुल्लक में से पैसे ले और किसी आवश्यक स्थान पर देने के लिए वह बांटने के लिए वाली गुल्लक में से पैसे दे। इससे बच्चे को यह भी समझ में आएगी कि उसे अपनी किस खास चीज को खरीदने के लिए और कितने पैसों को जोड़ने की जरूरत है। 

5. बच्चे को बचत करना और संयम रखना सीखाएं

वित्ती शिक्षा का सबसे पहला नियम है बचत और संयम। आप अपने बच्चे को इसके पहले पाठ के रूप में यह दोनों चीजें सीखाएं जिसमें उन्हें बताएं कि उन्हें निरंतर अपने पैसों को जोड़ना होगा और किसी भी चीज को खरीदने से पहले पर्याप्त पैसों के जुड़ने का इंतजार करना होगा। आप अपने बच्चे के साथ बैठें और उनके साथ उनके पैसों को सही जगह खर्च करने के बारे में भी बातचती करें आप चाहें तो छोटे बच्चों के लिए खुद ही छोटे-छोटे लक्ष्य तय कर सकते हैं, जैसे कि अगर वह 500-1000 रुपये जोड़ लोगे तो वह कोई खिलौना ले सकता है। 1000-2000 रुपये जुड़ने पर वह अपनी पसंद का कोई इंस्ट्रूमेंट ले सकता है। या फिर अगर आपका बच्चा कोई खिलौना चाहे तो आप बाजार से उसका मूल्य पूछ कर उसे उतने पैसों की बचत करने का भी लक्ष्य दे सकते हैं।

बच्चों को अगर आप शुरुआत से ही वित्तीय शिक्षा की छोटी-छोटी बारीकियों से रू-ब-रू कराएंगे तो जल्द ही वे अपने दूसरे निर्णयों के साथ-साथ वित्तीय निर्णय भी आराम से ले पाएंगे। इसके अलावा आप बड़े होने पर यही बच्चे वित्तीय मामलों में भी आत्म-निर्भर रहेंगे, जबकि इस बारे में जानकारी के आभाव में बच्चे बेहद ही आसंमजस्य की स्थिति में होते हैं, फिर चाहे उनके पास कितने भी पैसे क्यूं न हों।


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Ruchi Gupta

Last Updated: Fri Jul 10 2020

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