लड़का-लड़की का फर्क: कैसे बताएं बच्चे को- How to Talk to Kids about Gender in hindi

By Ruchi Gupta|8 - 9 mins| August 31, 2020

बच्चे तो हमेशा से ही जिज्ञासु रहते हैं। छोटी उम्र में ही वे अपने और खुद से भिन्न दिखने वाली हर चीज के बारे में जानना चाहते हैं। हम सभी ने देखा है कि जब बच्चा छोटा होता है तो वह हर चीज को हाथ से छू कर देखता है, लेकिन वहीं कभी अगर बच्चा गलती से अपने निजी अंगों को छूने लगता है तो हम उसे जोर से डांटते हुए या चिल्लाकर मना करते हैं। आपने सोचा है कि आपके चिल्लाने से बच्चे पर क्या असर आया होगा?

वाकई हमारे देश में अपने निजी अंगों के बारे में बातचीत पर भी मनाही है। लेकिन क्या हमारे बच्चों को यह भी अधिकार नहीं कि वे सही बात और तथ्य जान सकें? कैसे करें अपने बच्चों से इस बारे में बातचीत की शुरुआत आइए जानते हैं।

किस आयु में बच्चों के साथ कैसे बात की जाए, माता-पिता होने के नाते हमारे लिए यह जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि कम उम्र में बच्चों को अधिक जानकारी भी नहीं दी जा सकती और सही उम्र आने पर उनसे जानकारी छुपाना भी बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है। उनकी उत्सुकता को शांत करना भी माता-पिता की जिम्मेदारी होता है।

बच्चों से कैसे करें बातचीत की शुरुआत:

1. उम्र 0 से तीन साल: शारीरिक अंगों को टटोलना और नए शब्द सिखाना

ये उम्र होती है जब छोटे बच्चे अपने शरीर के प्रति सजग होते हैं। छोटे बच्चों के लिए लड़का और लड़की के शारीरिक अंगों के बारे में अधिक उत्सुकता रखना काफी स्वाभाविक है। 

  1. इस उम्र में आपको अपनी भाषा को बेहद सौम्य बनाते हुए उनसे लड़का और लड़की के शारीरिक अंगों में फर्क के बारे में बात करनी चाहिए। अक्सर छोटे बच्चे कपड़े बदलते समय या नहाते समय अपने निजी अंगों को हाथ लगाते है, इसमें कोई बुरी बात नहीं है। ऐसे में आप बच्चे के साथ हंसी-मजाक कर उसका ध्यान इस और अधिक आकर्षित न करें।
  2. इस उम्र में आपको अपने बच्चे को उसके निजी अंगों के सही नाम बताना भी बेहद जरूरी है। आमतौर पर माता-पिता अपने बच्चों को हंसते-हंसते कुछ अजीबो-गरीब नाम बताते हैं। ऐसे में सही उम्र आने पर भी बच्चे सही नामों का प्रयोग नहीं कर पाते। साथ ही बच्चों को ऐसे बनाए गए नामों से लगता है कि शरीर के खास हिस्सों के सही नाम लेने में जरूर कुछ बुराई है।
  3. छोटे बच्चों को अपने घर पर बिना कपड़ों के घुमना बेहद पसंद आता है। लेकिन आप अपने बच्चे को सीखाएं कि स्विम सूट के जरिये जिन अंगों को ढका जाता है, उन्हें दूसरों के सामने दिखाना या छुना गलत है।

2. उम्र 4 से 5 साल: बच्चे कहां से आते हैं?

जिस समय बच्चे बाहरी दुनिया से अधिक संपर्क में आते हैं, तो उनके सवाल भी तेजी से बढ़ने लगते हैं, जैसे कि बच्चे कहां से आते है? या मैं मम्मी के पेट से बाहर कैसे आया?

  1. इस उम्र में बच्चे आसानी से खुद के शारीरिक अंगों और दूसरों के अंगों के बारे में काफी कुछ जानना चाहते हैं। हो सकता है कि आपका 4 या 5 साल का बच्चा अपने निजी अंगों को छूता हो या दूसरों के बारे में जानना चाहता हो। ये गतिविधियां किसी गलत बात की ओर इशारा नहीं करतीं, बल्कि वे बच्चे की जिज्ञासा को दिखाती हैं। ऐसे में आप बच्चे का ध्यान गलत गतिविधियों की तरफ जाने से रोकें और उनका रूझान दूसरे खिलौनों या किताबों की तरफ बढ़ाएं।
  2. यह बिल्कुल सही उम्र है जब आप अपने बच्चे को समझाएं कि कोई भी अन्य व्यक्ति- बच्चे के दोस्त या कोई रिश्तेदार- उसके निजी अंगों को नहीं छू सकता। किसी समस्या के समय सिर्फ डॉक्टर या नर्स ही उन्हें जांचने के लिए छू सकते हैं या माता-पिता ही उसकी मदद करने के लिए उसे हाथ लगा सकते हैं।
  3. अगर इस समय आपका कोई करीबी गर्भावस्था से गुजरता है, तो आप बच्चे को बातों-बातों में बता सकते हैं कि उनके बेबी होने वाला है। लेकिन इस बारे में और अधिक तथ्य बताने के लिए अभी यह सही समय नहीं है।

3. उम्र 6 से 7: छोटी-मोटी जानकारी इकट्ठा करना

इस उम्र के बच्चों के दिमाग में कई प्रश्न होते हैं, जिनके लिए वे यहां-वहां से जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं, जैसे कि लड़का और लड़की के शरीर में किस प्रकार के अंतर होते हैं? या वाकई बच्चे कैसे पैदा होते हैं?

  1. अब समय है, जहां आपको थोड़ी-बहुत जानकारी अपने बच्चे के साथ साझा करनी होगी। इसके लिए आप किताबों का भी सहारा ले सकते हैं, जहां लड़का और लड़कियों के शरीर की बनावट और विभिन्न अंगों के बारे में बताया जा सकता है। साथ ही बच्चों को प्रजनन अंगों के बारे में भी बताएं कि जब शरीर का विकास होता है तो इन अंगों के माध्यम से बच्चे का जन्म होता है।
  2. इस समय आप बच्चे को यह भी सिखाएं कि कैसे वे अपनी सुरक्षा शारीरिक शोषण से भी कर सकता है और उसे अपने शरीर और अपनी सुरक्षा के लिए कैसे और क्या करना चाहिए। अगर आपके बच्चे को पसंद न हो कि कोई उसे कपड़े बदलते हुए देखे तो आप उसे बताएं कि वे नहीं जैसे शब्द का इस्तेमाल करे, ताकि उसे उसकी पूरी निजता मिल सके।
  3. इस उम्र में जब आप बच्चे को उसके शारीरिक अंगों के बारे में बता रहे हैं, तो उसे यह भी बताएं कि उसके शरीर में ऐसा कोई भी अंग नहीं है, जिसके लिए उसे शर्मिंदा होना पड़े। आप उसे बताएं कि अब भी वह आपके साथ आराम से बैठ, लेट या खेल सकता है और अगर उसकी मर्जी हो तो वह अपने भाई-बहन या माता-पिता के साथ नहा भी सकता है।
  4. अपने बच्चे को बताएं कि किसी से प्यार करना बुरी बात नहीं है। मम्मी-पापा भी एक-दूसरे को प्यार करते हैं और वे भी एक-दूसरे को गले लगा सकते हैं या फिर गाल पर प्यार कर सकते हैं।

4. उम्र 8 से 12: बच्चे को किशोरावस्था के लिए तैयार करना और उसके सवालों के सही जवाब देना

ये कुछ साल ऐसे होते हैं, जब बच्चे अपने सवालों की रफ्तार को कम कर देते हैं, लेकिन उनके भीतर बहुत कुछ चल रहा होता है। हो सकता है कि वे किसी चीज के बारे में बात न करें और लिंग संबंधित सवालों को पूछने में काफी शर्मिंदगी महसूस करें। कुछ मामलों में बच्चे इसके विपरीत भी हो सकते हैं, जब वे खुल कर बात करते हैं। परिस्थिति कुछ भी हो यह सही समय है जब आपको आपके बच्चे के साथ बात करनी चाहिए।

  1. अपने बच्चे को बात शुरू करनें दें और आप इस संबंध में उसके सवालों का जवाब दें। यहां आपको उनसे जानना चाहिए कि आपका बच्चा कितना जानता है और उसकी जानकारी कितनी सही है, कितनी गलत। आप अपने बच्चे से पूछें कि क्या वह और कुछ जानना चाहते हैं? और जब आप उनसे बात कर लें तो उनसे यह जरूर पूछें कि क्या उन्हें उनके सवाल का जवाब मिला या नहीं?
  2. आप टेलीविजन या अन्य माध्यमों को देखने के माध्यम से भी जान सकते हैं कि आपके बच्चे के दिमाग में सेक्स से संबंधित कोई सवाल हैं या नहीं। जो बच्चे अगर किसी भी दृश्य पर मुंह बनाते हैं, दरअसल वे इस बारे में जानने के लिए अधिक आतुर होते हैं। तो ऐसे में आप उनसे इन माध्यमों में सेक्स और लिंग भेद के बारे में उनसे बात कर सकते हैं।
  3. आप अपने बच्चे को किशोरावस्था के लिए तैयार करें। आपको स्कूल या अध्यापिकों पर अधिक निर्भर नहीं करना चाहिए कि बच्चा वहीं से सीखेगा। दरअसल वहां बच्चों को काफी कम और काफी देर से भी इस बारे में जानकारी दी जाती है। आज के समय में शारीरिक बदलावों को 13 साल से पहले भी देखा जा सकता है। ऐसे में आप अपने बच्चे में बदलावों के आने से पहले ही उन्हें इनके लिए तैयार करें।
  4. जब भी आप इन शारीरिक बदलावों और हाॅर्मोनल बदलावों के बारे में बात करें तो आप उन्हें सेक्स के बारे में भी बताएं, लेकिन सिर्फ थोड़ा बहुत। खासतौर पर तब तक आप अधिक जानकारी न दें, जब तक आपका बच्चा खुद से सवाल न करे। आप एक समय में एक ही विषय पर बात करें, ताकि आपका बच्चा पहले थोड़ी जानकारी को जज्ब कर सके।
  5. मीडिया पर बच्चों को अश्लील तस्वीरों या वीडियोज को सर्फ करने के चेतावनी जरूर दें। आप उन्हें बताएं कि कैसे ये सब चीजें अभी उनके दिलो-दिमाग को प्रभावित कर सकता है।
  6. अपने बच्चे से खुलकर बात करें। अगर आप अभी तक सेक्स जैसे विषय पर अपने बच्चे से बात करने में शर्माते हैं तो भी आपको अपने बच्चे के लिए इन विषयों का प्रमुख स्रोत बनना होगा। आप हर विषय फिर चाहे वह शारीरिक बदलाव हो, मनोभाव या फिर सेक्स, इन विषयों पर अपने बच्चे के सभी सवालों का जवाब जरूर दें।

अगर आपने अभी तक अपने बच्चे को सही जानकारियों से लेस रखा है तो उम्मीद है कि उनके भटकने की आशंका बेहद ही कम होगी।


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Ruchi Gupta

Last Updated: Mon Aug 31 2020

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