कैसे संभालें अपने अटेंशन सीकिंग बच्चे को – How to Handle an Attention Seeking Child in Hindi

By Ruchi Gupta|8 - 9 mins| September 20, 2020

बच्चे छोटे होते हैं तो हमेशा मम्मी-पापा की रट लगाए रखते हैं। कभी कुछ अच्छा किया तो ‘मम्मी, देखो न!’ कभी कुछ टूट गया तो ‘मम्मी, देखो न!’ शुरु-शुरु में तो सब अच्छा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह बच्चे की आदत बन जाती है और उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाती है। ऐसे बच्चों को कहते हैं, अटेंशन सीकिंग चाइल्ट या ध्यान आकर्षित करने वाले बच्चे। कैसे संभालें अपने अटेंशन सीकिंग बच्चों को आइए जानते हैं स्कूलमाईकिड्स के साथ।

‘मम्मी मेरी बात सुनो!’

‘जल्दी से ईधर आओ न!’

‘आप देखो तो सही!’

‘ओह! ये तो टूट गया।’

‘मुझे चोट लग गई!’

मेरी बेटी अक्सर मुझे इसी तरह से पूरे दिन बुलाती रहती है। फिर भले ही बात बिल्कुल भी खास न हो, लेकिन उसके बुलाने का अंदाज ऐसा लगता है, जैसे बहुत जरूरी कुछ काम है। कई बार तो मैं भी अपने सभी काम छोड़कर भागती हूं, कि न जाने क्या बात हो गई। पर अब मुझे समझ आने लगा है कि यह तो उसकी आदत है। क्यों? क्योंकि छोटे बच्चों को हर समय आपका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना पसंद होता है। लेकिन एक हद के बाद बच्चों के मामले में ध्यान आकर्षित करना एक समस्या बन जाता है।

कभी माता-पिता के ध्यान के लिए तो कभी उनके प्यार के लिए बच्चे अक्सर ऐसे बहाने बनाते हैं, जिनसे उनके माता-पिता उनके पास दौड़े चले आएं। लेकिन कई मामलों में जब माता-पिता बच्चे पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते तो ऐसे में बच्चा बद्तमीजी करने लगता है। आप भले बच्चे की अच्छाई को अनदेखा कर देंगे, लेकिन उसकी गलती को, कभी नहीं। ऐसे में आप भले गुस्से में सही उससे बात जरूर करेंगे। यह भी एक बहुत बड़ा कारण है कि बच्चे आपका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए गलतियों पर गलतियां करते चलते हैं, जो बाद में उनके स्वभाव का ही एक हिस्सा बन जाती हैं।

तो क्या माता-पिता का बच्चे पर ध्यान देना गलत है? बिल्कुल भी नहीं। कई अध्ययनों की मानें तो जिन बच्चों पर माता-पिता ध्यान नहीं देते, वे बच्चे दूसरे बच्चों के मुकाबले अधिक बिगड़े हुए होते हैं। बच्चे तो ध्यान आकर्षित करना ही चाहेंगे, लेकिन यह आपको तय करना है कि आपको कब बच्चे की बात पर ध्यान देना है और कब नहीं।

कितना ध्यान देना सही है?

आपको आपके बच्चे की बातों पर कब और कितना ध्यान देना चाहिए, यह आप पर निर्भर करता है। आप अपने बच्चे के ध्यान आकर्षित करने को कितना झेल सकते हैं? सच तो यह है कि आप जितना बच्चे को ध्यान देंगे और उसे उतना ही आपका ध्यान चाहिए होगा। इसके लिए आपको बच्चे की मांग और आपकी उसे ध्यान देने की क्षमता के बीच में संतुलन बनाना होगा। आजकल जैसा कि हम सभी घरों में है, वहां तो बच्चे हर दो मिनट में आपको आवाज देते होंगे। क्या वाकई आपमें इतनी ताकत, इतनी क्षमता है कि आप हर बार उनकी बात सुन सकें?

अपने बच्चे की जरूरत को उसकी मांग न बनने दें। कई बार जब माता-पिता बच्चे की सीधे तरीके से बात नहीं सुनते तो वे अपनी बात को मनवाने के लिए नखरे, ना-नुकर, गुस्सा और छेड़खानी करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि शायद मेरी बद्तमीजी से ही सही पर मम्मी मुझे कम से कम सुनेंगी तो सही।

कैसे-कैसे बच्चे करते हैं ध्यान आकर्षित

बच्चे कोई काम करते हैं तब उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार बड़ों की ध्यान देना और उनकी सहमति होता है। लेकिन कभी-कभी ही माता-पिता इस ध्यान को सही तरीके से इस्तेमाल कर पाते हैं। अगर हम बात करें कि बच्चे कैसे-कैसे बड़ों का ध्यान आकर्षित करते हैं तो वह है दो तरह से:

1. सकारात्मक तरीका

ध्यान आकर्षित करने का यह तरीका बच्चा सबसे पहले सीखता है या यह कहें कि हम उसे सबसे पहले ही तरीका सीखाता हैं। जैसे कि बच्चे को हमें कुछ कहा और उसने वह काम कर दिया तो हम उसकी पीठ थपथपाते हैं। अब जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वह अपने हर अच्छे काम करने पर अपने बड़ों को देखता है कि उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी। आपका ताली बजाना, उसे प्यार करना, उसकी पीठ थपथपाना, इन सब चीजों को पाने के लिए वह बार-बार आपको आवाज देता है। आपके साथ के लिए बच्चा अक्सर आपको आवाज देगा। उसे पता है कि आप हर बार अच्छे काम के लिए उसे सुनते हैं।

माता-पिता को क्या करना चाहिए

  1. माता-पिता अच्छे काम के लिए जरूर बच्चे की तारीफ करें। इससे बच्चे को और अच्छा प्रयास करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। अगर आपका बच्च बड़ा है तो आप उसकी पूरे दिन की रूटीन जानने के साथ उसे उसके बेहतर प्रयासों के लिए जरूर शाबाशी दें और उसका प्रोत्साहन बढ़ाएं।
  2. अगर समय न हो तो अभी उसे अपना काम करने को कहें और साथ ही बताएं कि आप कुछ देर बाद दोबारा उसकी बात सुनेंगे। कई बार माता-पिता कोई जरूरी काम कर रहे होते हैं, जिसकी वजह से वे बच्चे को अपनी अपना समय नहीं दे पाते। ऐसे में वे बच्चे से स्पष्ट शब्दों में कहें कि वे अभी किसी जरूरी काम में व्यस्त हैं और वह काम खत्म होते ही बच्चे की बात जरूर सुनेंगे।
  3. अगर बच्चा छोटा है तो उसे कहें कि वह हर बार आपको आवाज न दें, बजाए इसके वह पहले पूरा काम करे और फिर आप उसे देखेंगे। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी यह बहुत जरूरी होता है कि आप उन्हें खुद से पूरा काम करने दें। बीच-बीच में देखने से आप उसकी गलतियों को ठीक तो करवा देंगे, लेकिन बच्चे को पूरा काम खुद से करने का संतोष नहीं अनुभव होगा। साथ ही आप भी अपना ध्यान पूरी तरह से किसी दूसरे काम को नहीं दे पाएंगे।

2. नकारात्मक तरीका

दूसरा तरीका है नकारात्मकता का। अक्सर बच्चे इसे तब अपनाते हैं, जब वे देखते हैं कि उनके किसी भी अच्छे काम के लिए आप उन्हें कुछ नहीं कहते। लेकिन जैसे ही उनसे कुछ गलती होती है, तो आप बहुत तीव्र प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे कि आपका बच्चा दिन भर आराम से अपनी पढ़ाई करता रहा। अपने कमरे में आराम से खेलता रहा और जब परिवार के साथ खाना खाते हुए उससे पानी गिर जाता है तो आप अचानक से उस पर भड़क उठते हैं। इसके बाद वह जानता है कि आपको गुस्सा या उकसाने के लिए बस उसे गलती करनी है। कम से कम तब तो आप उससे बात करेंगे ही। लेकिन आपने सोचा है कि आपने जैसे ही उसे गलत काम करने पर प्रतिक्रिया दी और दिनभर के बारे में कोई चर्चा नहीं कि तो यह उसे नकारात्मक ध्यान आकर्षित करने की ओर धकेलता है।

माता-पिता को क्या करना चाहिए

  1. अपने बच्चे को उसके अच्छे काम के लिए शाबाशी दें। बच्चा बड़ा हो गया है तो अच्छे काम करेगा ही, यह सोच कर उसकी अनदेखी न करें। अगर आपके समय कम है तो भी आप उसकी चीजों में दिलचस्पी दिखाएं और उसे प्रोत्साहित जरूर करें।
  2. उसकी गलतियों को नजरअंदाज करें। गलतियों पर चीखने-चिल्लाने या गुस्सा न दिखाएं। वैसे तो यह काफी मुश्किल है, लेकिन इसे करना ही माता-पिता के पास एक मात्र तरीका है। जब बच्चा देखेगा कि आप उसकी गलतियों पर उसे कुछ भी नहीं कहते तो वह इसे करना बंद कर देगा।
  3. बच्चे को साफ-साफ शब्दों में आप कह सकते हैं कि तुम्हारे रोने या चिल्लाले से मुझे तुम्हारी बात समझ नहीं आती। अगर कुछ कहना है तो बिना रोए कहे। इसे हम चेतावनी देनाभी कहते हैं। इसके लिए आप दो से तीन मिनट का समय बच्चे को दें। अगर फिर भी उसे आपकी बात समझ में नहीं आती तो आप उसे कह सकते हैं कि अगर वह अब भी नहीं शांति से बात करेगा तो आप चले जाएंगे। आपके इतने कठोर शब्दों का बच्चे पर बहुत जल्द असर होगा।
  4. उन्हें अपना समय दें। उनके दूसरे कार्यों में दिलचस्पी दिखाएं। आपको शायद यकीन न हो, लेकिन एक सर्वे के मुताबिक अमेरिका जैसे विकसित देश में माता पिता औसतन पूरे सप्ताह में अपने बच्चे को लगभग 7 मिनट का समय ही दे पाते हैं। लेकिन अपने बच्चे में अनुशासन और प्रोत्साहन बनाए रखने के लिए जरूरी कि आप रोज उससे बातचीत करें और उनके साथ अच्छा वक्त बिताएं।
  5. अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा नकारात्मकता का सहारा न ले तो आप अपने काम से लौटने के बाद लगभग 30 मिनट का समय अपने बच्चे को जरूर दें। सिर्फ बच्चों की गलतियों पर उनके साथ बैठ कर बातचीत करना ही काफी नहीं है। बच्चा गलती न करे, इसके लिए भी उनके साथ बैठना जरूरी है।

वैसे इसके अलावा एक बीच का रास्ता भी होता है, माता-पिता का ध्यान आकर्षित करने का। उसमें बच्चा न तो खुशी से और न ही गुस्से से बातचीत करता है, बल्कि वह चुपचाप एक कोने में बैठता है और इंतजार करता है कि कब उसके माता-पिता उसे सुनेंगे। अगर आपका बच्चा भी ऐसा ही कुछ करता है तो आप जल्द से जल्द उसे सुनें और उसे बताएं कि चुपचाप बैठने से उसकी बात सभी को समझ नहीं आएगी। अगर उसे कुछ कहना है तो वह आपसे आराम से बात करे। ऐसे बच्चों के साथ माता-पिता को भी बातचीत के माध्यम से ही रास्ता खोजना पड़ता है।


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Ruchi Gupta

Last Updated: Sun Sep 20 2020

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