बच्चों पर पालतू जानवर के 7 सकारात्मक प्रभाव- How do Pets Affect Child Development in Hindi

By Kavya |6 - 7 mins| August 18, 2020

जानवर खासकर पालतू जानवर किसी को भी बिना किसी शर्त के प्यार करते हैं। उनके साथ हम सुरक्षित महसूस करते हैं, यहां तक कि उनके साथ रहने से हमें अपनी परेशानियां छोटी लगने लगती हैं। लेकिन क्या पालतू जानवरों का प्यार बच्चों की भी मानसिक सेहत पर सकारात्मक असर डालता है? आइए जानते हैं इस जवाब का सवाल स्कूलमाईकिड्स के साथ।

मेरी एक सहेली है, उसका एक ही बेटा है, जो अक्सर अकेला ही बैठा रहता है। उसे दूसरे बच्चों के साथ भी खेलने में कोई खास मजा नहीं आता। और तो और कोई उसके घर भी जाता है तो वह तब भी वह दूसरों से दूरी बनाए रखता है। ऐसे में मेरी सहेली को एक बात का डर बहुत सता रहा था, कि कहीं उसका बेटा अकेला तो नहीं पड़ जाएगा? वह उसे सामाजिक कौशल के गुर कैसे सिखा पाएगी?

ऐसे में उसने मदद ली एक मनोवैज्ञानिक की। उन्होंने उसे बताया कि उसके बच्चे को कोई समस्या नहीं है। वह सिर्फ दूसरों पर आसानी से विश्वास नहीं कर पाता, इसीलिए वह दूसरों से दूर-दूर रहता है। उन्होंने उसे अपने घर में एक पालतू कुत्ता रखने की सलाह दी। मेरी सहेली को कुत्तों से कोई खास लगाव नहीं था, लेकिन अपने बच्चे के लिए वह घर में एक लैब्राडोर कुत्ता ले आई। जिस वक्त वह अपना कुत्ता लाई थी, उसके कुत्ते की उम्र सिर्फ 30 दिन की थी। और अब 1 साल में जिंजर (कुत्ता) उस घर की रौनक बन गया है। उसका बेटा भी अब पहले से काफी खुश नजर आता है और घर आने-जाने वालों से थोड़ी-थोड़ी बात भी करता है।

कैसे पालतू जानवर बच्चे की मानसिक सेहत के लिए मददगार होते हैं:

1. बिना किसी शर्त के पालतू जानवर करते हैं प्यार

पालतू जानवर परिवार के एक सदस्य की तरह होते हैं। लेकिन वे बिना किसी पूर्वाग्रह के प्यार करते हैं। खासकर ऐसे बच्चे जो परिवार में अकेली संतार होते हैं या जिनके लिए माता-पिता के पास समय कम होता है या जो किसी भावनात्मक दुविधा से जूझ रहे होते हैं, उन्हें पालतू जानवर के रूप में एक अच्छा श्रोता मिल जाता है। जानवर भले हमारे जैसे बातचीत नहीं कर पाते, लेकिन वे बच्चों को सहज करने, उन्हें अपना समर्थन देने और उनकी परेशानियों को सुनने का काम बहुत अच्छे से रते हैं। साथ ही जब बात खेलने की होती है तो यही पालतू जानवर आपके बच्चे का अच्छे से साथ देते हैं।

2. पालतू जानवर से बच्चे अपने गुस्से पर काबू करना सीख सकते हैं

कई बार बच्चों को जब छेड़ा जाता है और उन्हें सुनने के लिए कोई भरोसेमंद व्यक्ति नहीं मिलता तो ऐसे में वे अपना गुस्सा दूसरे बच्चों पर निकालते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में जब आपका पालतू जानवर हर हाल में आपके बच्चे को प्यार करता है तो बच्चे भी खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं और अपना सारा गुस्सा उसे कह कर निकाल लेते हैं।

3. पालतू जानवर बच्चों को सहानुभूति रखना भी सिखाते हैं

एक पालतू जानवर जो पूरी तरह से आप पर निर्भर है, उससे बच्चे सहानुभूति अच्छे से सीख सकते हैं। जब आप घर पर पालतू जानवर को लाते हैं तो बच्चा उसकी देख-रेखर उसकी जरूरतों को समझना जैसे कि कब उसे भूख लगी है, आदि भी सीखता है। कुत्ते और अन्य जानवर बारिश, तेज हवा या पटाखों की आवाज से डरते हैं। ऐसे में उन्हें कोई प्यार से अपने साथ रखने वाले की जरूरत होती है। ऐसे में बच्चा अपने पालतू जानवर से सहानुभूति भी रखता है और उसे सहज करने की भी पूरी कोशिश करता है।

4. बच्चों को जिम्मेदारी और आत्म-विश्वास दोनों सीखने को मिलता है पालतू जानवरों से

एक पालतू जानवर को घर पर लाना कोई कम जिम्मेदारी भरा काम नहीं है। लेकिन जब बच्चा अपने जानवर को बाहर घूमाने या फिर उसके खाने-पीने का ध्यान रखता है तो उसे भी जिम्मेदारी निभाने का अहसास होता है। और यही अहसास बच्चे को आत्म-विश्वास भी देता है। तीन से चार साल तक की छोटी उम्र के बच्चे भी अपने कुत्ते या बिल्ली को समय पर खाना खिलाने जैसे काम करने में सक्षम होते हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है वह अपने पालतू जानवर की अधिक से अधिक देख-रेख करना सीखता है।

5. पालतू जानवर की मदद से बच्चे सामाजिक गतिविधियों में अधिक भाग लेते हैं और बातचीत करना सीखते हैं

छोटी सी उम्र में ही बच्चे जो अभी बोलना सीख ही रहे होते हैं, वे भी अपनी भाषा में अपने पालतू जानवर से बातचीत करना पसंद करते हैं। यहां तक कि बच्चा अपने पालतू जानवर के साथ घर के एक कोने से दूसरे कोने में घुमते-फिरते हैं। इस तरह पालतू जानवर बच्चे को न सिर्फ सामाजिक या भावनात्मक सहयोग करते हैं, बल्कि उनकी संज्ञानात्मक कौशल को बढ़ाने में भी मददगार साबित होते हैं। अगर आप बच्चे के सामने कुछ शब्द बोलते हैं और आपका पालतू जानवर उस पर अपनी प्रतिक्रिया देता है तो इससे बच्चे को भी वही शब्द दोहराने में मदद मिलती है और बच्चा बार-बार वही शब्द दोहराते हुए जानवर के साथ बातचीत करने लगता है। और एक बार बोलने की झिझक खुलने के साथ ही बच्चा दूसरों के साथ भी अच्छे से बातचीत करने लगता है।

6. पालतू जानवर बच्चों के लिए उपचार का काम करते हैं

पालतू जानवर का प्यार खराब से खराब परिस्थिति से बाहर निकलने में हमारी मदद करता है। कई अध्ययनों के मुताबिक पता चला है कि पालतू जानवरों के साथ रहने से ब्लड प्रेशर, किसी पुरानी बीमारी से तेजी से ठीक होने में मदद और तनाव या बेचैनी को कम करने में भी मदद मिलती है। यहां तक कि कई साइकोलाॅजिस्ट बच्चों की विभिन्न मानसिक समस्याओं का समाधान पालतू जानवरों के माध्यम से कराने में भी पीछे नहीं हटते। बच्चों का ऐसा मानना होता है कि उन्हें बिना किसी शर्त के सबसे अधिक प्यार करने वाला या उनकी बात को सुनने वाला कोई है तो वह उनका प्यारा पालतू जानवर है।

7. पालतू जानवर बच्चों के मूड को भी खुशनुमा बनाने में मदद करते हैं

जहां हम एक तरफ कहते हैं कि पालतू जानवर बच्चों की दिनचर्या का तनाव कम करने में बच्चों की मदद करते हैं, वहीं यह भी एक सच है कि वे बच्चों को एक खुशनुमा जिंदगी जीने के लिए भी प्रेरित करते हैं। पालतू जानवरों के साथ खेलने से हमारे शरीर में डोपामाइन और सेरोटोनिन की मात्रा में भी इजाफा होता है, जिसकी वजह से हमारा दिमाग शांत और रिलेक्स होता है और मूड भी बढि़या हो जाता है। जिन घरों में बच्चे ज्यादातर उदास रहते हैं, वहां पालतू जानवर के होने से घर में रौनक भी बढ़ जाती है।

पालतू जानवर कोई भी हो, चाहे मछली, कुत्ता, बिल्ली, कबूतर या तोता, ये हमारे दिमाग को शांत और रिलेक्स करने में बेहद मददगार होते हैं और साथ ही साथ हमारे दिमाग और शरीर के बीच अच्छा संतुलन भी बनाते हैं। अपने पालतू जानवर के साथ खेलना बच्चे के लिए सीखने का एक अच्छा स्रोत हो सकता है। अपने प्यारे कुत्ते या बिल्ली को कोई नई चीज सिखाने से जहां बच्चे संयम का महत्व सीख सकते हैं, वहीं जानवर के साथ रहने से वे अपना सामाजिक दायरा भी बढ़ा सकते हैं।


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Kavya

Last Updated: Tue Aug 18 2020

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