स्कूल जाते वक़्त बच्चे क्यों रोते हैं: कारण और उपाय Child Cries while going to school Reasons and Tips How to Stop in Hindi

By Kusum Lata | 3-4 mins read | मार्च 13, 2020 Medically Reviewed by: Dr. Neelima Pandey
स्कूल जाते वक़्त बच्चे क्यों रोते हैं: कारण और उपाय  Child Cries while going to school Reasons and Tips How to Stop in Hindi

मैं एक तीन वर्षीय चुलबुली और प्यारी बेटी की माँ हूँ। अब तक तो ज्यादातर समय मेरी यह लाडली मेरे साथ घर में रहती है। लेकिन अब जबकि वह तीन वर्ष की हो चुकी है तो उसे आधे दिन के लिए घर से बाहर यानी स्कूल में रहना होगा। मैं यह सोच - सोचकर ही परेशान हो रही हूँ की जब मेरी यह लाडली प्ले वे स्कूल यानी किंडरगार्टन जाते वक़्त इतना रोती थी, वहां जाने से बचती थी तो फिर वह नर्सरी में दाखिले के बाद स्कूल कैसे जाएगी, वहां के माहौल में खुद को कैसे एडजस्ट करेगी। अब कुछ दिनों बाद से उसे स्कूल जाना होगा। मैं समझ नहीं पा रही थी कि अपनी बेटी को स्कूल जाने के लिए कैसे तैयार करूं। ऐसे बहुत से माँ बाप होंगे जिनकी यही समस्या होगी कि अपने बच्चे को स्कूल जाने के लिए कैसे तैयार करें। तो इस समस्या के समाधान के लिए हमने बात की जानीमानी मनोवैज्ञानिक डॉ नीलिमा पांडेय से। इस लेख के माध्यम से आपकी इस समस्या का समाधान करने में काफ़ी मदद मिलेगी।

बच्चा स्कूल जाते वक़्त क्यों रोता है

ऐसे बहुत कारण हैं जिससे बच्चा स्कूल जाते समय रोता है। तो से आइए जानते हैं इन कारणों के बारे में।

1. नींद पूरी ना होना

अब तक बच्चा अपने अनुसार सोता जागता है लेकिन अब उसे समय से जागना ज़रूरी है। संभव है कि जल्दी उठने उसे बेचैन के रहा हो।

2. बंधन महसूस होना

घर में बच्चा बिना किसी रोक टोक के रहता है वहीं स्कूल में उसे अनुशासन के रहना होता है। वहां बच्चे को टीचर की बात माननी पड़ेगी। समय से खाना होगा। ऐसे में बच्चा खुद को बंधन में जकड़ा हुआ महसूस करता है।

3. माँ - बाप से दूर रहने का डर

स्कूल जाते समय बच्चे के परेशान करने का एक और बड़ा कारण माँ - बाप से दूर रहने के डर का मन में होना है। छोटे बच्चे के लिए उसकी पूरी दुनिया उसका घर और उसके माँ - बाप ही हैं।

4. स्कूल का माहौल पसंद न आना

कई बार बच्चों को स्कूल का माहौल पसंद नहीं आता। उनका मन स्कूल में बिल्कुल नहीं लगता इसलिए भी बच्चा स्कूल जाने से बचना चाहता है।

5. टीचर का भय

बच्चा टीचर से कई बार डर जाता है जिससे स्कूल नहीं जाना चाहता। वास्तव में बच्चा टीचर की तुलना अपनी माँ से करता है। लेकिन टीचर को पूरी क्लास का ध्यान रखना होता है साथ ही उन्हें बच्चों को अनुशासन में भी रखना होता है जिससे वह थोड़ा तेज आवाज में बात कर सकती है और बच्चा घबरा जाता है।

6. कुछ और भी हो सकता है कारण

शुरू में बच्चा स्कूल जाने से कतराता है लेकिन धीरे - धीरे उसे समझ आ जाता है कि उसे स्कूल जाना ही है। अगर कुछ समय बाद भी बच्चा स्कूल जाने से बचता है तो आप पता करें कि स्कूल में बच्चे को कोई और परेशानी तो नहीं है, कहीं कोई उसे किसी तरह का नुकसान पहुंचाने की कोशिश तो नहीं कर रहा।

कैसे करें तैयार बच्चे को स्कूल भेजने के लिए

आमतौर पर बच्चा से शुरू के कुछ दिनों स्कूल जाने के लिए परेशान करेगा। और जैसे ही वह स्कूल के वातावरण में घुल मिल जाएगा, नए दोस्त बनाएगा, उनके साथ खेलेगा, बहुत सी एक्टिविटी करेगा, वह खुद ब खुद ही स्कूल जाते समय खुश या सामान्य दिखाई देगा। इस अनुभव से मैं गुजर चुकी हूं। मेरी ग्यारह वर्षीय बड़ी बेटी सातवीं क्लास में आने वाली है। नर्सरी क्लास में स्कूल में गुमसुम सी रहती थी, स्कूल जाने पर रोती थी। वहीं आज उसको अपने स्कूल से बहुत प्यार है। वहां जाकर पढ़ाई करना, दोस्तों के साथ खेलना -कूदना और खूब बातें करना उसे बहुत पसंद है। यहां तक कि स्कूल की छुट्टी होने पर वह घर में ऊब (बोर) जाती है। इसलिए मैं या किसी भी माँ को घबराने की ज़रूरत नहीं है। बस ज़रूरत है तो थोड़ा बच्चे को तैयार की। तो आइए जानते हैं कैसे अपने बच्चे को स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाए।

1. खुद सहज रहें और बच्चे को भी रहने दें

स्कूल जाना और जाते समय बच्चे का रोना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे में आप खुद आराम से रहें। आप परेशान होंगे तो बच्चा भी घबरा जाएगा। यह समय है बच्चे को भावी जीवन में सफलता पाने के लिए तैयार करना। इसलिए प्रसन्न मन से स्थिति का सामना करें और बच्चे को मज़बूत बनाएं, कमज़ोर नहीं।

2. मानसिक रूप से बच्चे को तैयार करें

सबसे पहले बच्चे का मानसिक रूप से स्कूल जाने के लिए तैयार करना ज़रूरी है। वैसे बच्चा 4-5 साल की उम्र में ज्यादा कुछ समझने लायक नहीं होता, फिर भी किसी न किसी तरह उसे स्कूल के बारे में बताइए। अपने बारे में बताइए कि आप भी स्कूल गई थी, पापा भी स्कूल गए थे, सबको अच्छी अच्छी बातें सीखने, नए दोस्त बनाने के लिए स्कूल जाना पड़ता है, इस तरह की छोटी बालमन की समझ में आने वाली बातें उससे कीजिए।

3. समय से सोने - जागने की आदत डालें

स्कूल जाने से लगभग महीने भर पहले से बच्चे को सही समय से सोने व जागने की आदत डालिए। यह आदत न होने पर बच्चा सुबह जागने में आनाकानी करेगा और चिड़चिड़ा भी हो सकता है।

4. स्कूल के बारे में अच्छी व मज़ेदार बातें बताएं

बच्चे को स्कूल के बारे में कुछ ऐसी बातें बताएं जिससे वहां जाने में उसकी रुचि जगे। स्कूल में होने वाली एक्टिविटी, खेलते हुए बच्चे, झूले, नाचते -गाते बच्चे, खेल का मैदान आदि की वीडियो दिखाकर बच्चे को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित कीजिए।

5. बड़े भाई - बहन या उसके दोस्त का उदाहरण दें

बच्चे को उसके बड़े भाई -बहन, उसके दोस्त का उदाहरण दें कि वे खुशी - खुशी स्कूल जाते हैं तो उसे भी खुश होकर स्कूल जाना चाहिए। यह बात प्यार से उसे समझाइए।

6. स्कूल भेजते समय उत्साहित रहें

जब बच्चा स्कूल जा रहा हो तो आप काफ़ी खुश नज़र आने चाहिए जिससे बच्चे को भी लगे कि वह एक अच्छी जगह जा रहा है। अगर आप परेशान या दुखी होंगे तो बच्चा भी परेशान होगा।

7. टीचर की मदद लें

बच्चा अगर स्कूल जाने में बहुत ज्यादा परेशान कर रहा है तो उसकी टीचर की मदद लें। टीचर प्यार से बात करे, उसे रोज स्कूल आने के लिए प्रेरित करे। उसका मन लगाने की कोशिश करे। उस गेम खिलाए, कुछ देर उसका मनपसंद कार्टून आदि दिखाए। हो सके तो कुछ चॉकलेट टीचर को देकर, इनमें से एक चॉकलेट बच्चे को देने को कहें।

8. नए दोस्त बनाने व उन्हें टॉफी देने को कहें

हमउम्र दोस्त बनाना भला किसे पसंद नहीं होता फिर चाहे वे बच्चे हों या बड़े। तो आप कुछ टॉफियां देकर अपने बच्चे से कहिए कि वह इन टॉफियों को अपने क्लासमेट को दे और उन्हें अपना दोस्त बनने को कहे, साथ खेलने को कहे।

9. किसी तरह का डर या धमकी न दें

स्कूल जाते वक़्त बच्चे को किसी तरह की धमकी न दें। उससे अपने दूर जाने की बात कहकर मन में डर पैदा न करें। उससे कहें कि आप उसके स्कूल के आसपास मौजूद रहेंगे, जिससे बच्चे को अहसास हो कि आप उसके पास हैं।

10. उसका पसंदीदा खाना लंच में दें

टिफिन में उसका मनपसंद खाना देने की बात बच्चे को बताएं। उसे उसकी पसंदीदा चीज़ों का लालच दें। उसकी पसंद का फल भी रखें। उससे पूछिए कि एडीजे टिफिन में उसे क्या चाहिए।

11. उसके मनपसंद खिलौने उसके साथ रखें

शुरुआती दिनों में टीचर की परमिशन लेकर बच्चे के एक - दो खिलौने उसके साथ दें जिससे वह उन्हें देखकर खुश रहे।

यह लेख डॉ. नीलिमा पांडेय, मनोवैज्ञानिक, पीरामल फाउंडेशन, से बातचीत पर आधारित है

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Kusum Lata

Last Updated: मार्च 13, 2020
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